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छोटे बच्चों को कैसे पढ़ाएं

दोस्तो, माता पिता के तौर पे  सबसे बड़ा चिंतन का जो विषय होता है वह यह होता है कि उनके बच्चे का पढ़ाई के अंदर मन कैसे लगे. जिस तरीके से टीवी, मोबाइल और वीडियो गेम के अंदर बच्चे बड़े ही इंटरेस्ट के साथ वह सारी चीजों करते हैं वैसे ही इंटरेस्ट के साथ उनकी पढ़ाई और उनके एग्जाम को किस तरीके से फेस करें। इसीलिए आज हम आप के लिए इसी महत्वपूर्ण विषय पर यह लेख “छोटे बच्चों को कैसे पढ़ाएं” लेकर आये हैं.

जहां पर हम आपके बच्चे का टीवी, मोबाइल या वीडियो गेम के अंदर जितनी रूचि है उतनी ही रूचि उसकी पढ़ाई के लिए कैसे बना पाएं। इन्ही बातों चर्चा करेंगे। 

कई बार ऐसा होता है कि बच्चे पढ़ते तो है परन्तु पढ़ने में उनका मन नहीं लगता। कुछ बच्चे वैसे होते हैं जो पढ़ लेते हैं लेकिन पढ़ा हुआ उनको परीक्षा के समय पर याद नहीं आता.

काफी सारे बच्चे ऐसे होते है कि जब आप उनको मौखिक रूप में पूछते है तो सारी चीजें उनको याद आती है, लेकिन जब वो परीक्षा में लिखने बैठते हैं तो लिखते वक्त उनको याद नहीं आता.

तो आज आपको कुछ ऐसी चीजें बताएंगे जिससे आप अपने बच्चों  समय में ज्यादा पढ़ाई करवा सकते हो. 

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कभी भी किताब का पहाड़ लेकर मत बैठिए 

छोटे बच्चों को कैसे पढ़ाएं

जी हाँ, अक्सर देखते हैं कि माता-पिता जब भी बच्चों को पढ़ाने बैठते हैं तो किताबों का पहाड़ लेकर बैठ जाते हैं. मतलब आपको एक-एक विषय को एक-एक करके ही पढ़ाईए।

ऐसा नहीं होना चाहिए कि पूरा बैग लेकर बैठ गए हो और बच्चे को बोल रहे हो कि अब तूने 5 घंटे पढ़ाई करनी है. क्योंकि इससे मानसिक दबाव ज्यादा पड़ता है से ज्यादा पड़ता है और बच्चा पहले ही विषय में ऐसा व्यव्हार करने लग जाता है जैसे वो उसका आखरी होने वाला है और वो बोलने लगता है कि अब मैं इसके बाद पढ़ाई नहीं करूंगा।

और वो पहले विषय को बड़ा ही धीरे-धीरे करता है. इसलिए अपने क्या करना है, हिंदी पढ़ा रहे हो तो हिंदी की किताब लेकर ही बैठो बाकी कोई किताब लेकर मत बैठो।

बगल में किताबों का पहाड़ बनाकर मत बैठो, एक बारी में एक सब्जेक्ट और एक किताब। आप यह नियम बना लीजिए, इससे आपके बच्चे का जो मानसिक दबाव है वह नहीं पड़ेगा और वह थोड़ा सा जल्दी-जल्दी काम करेगा।

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लेकिन अगर उसे पता है कि मैंने अभी पांच विषयों की और पढ़ाई करनी है तो बच्चा पहले में ही बिल्कुल जी-चुराने  वाली हरकतें लग जाएगा।

इसलिए एक बारी में एक किताब और एक सब्जेक्ट वाला नियन पालन कीजिए।

बैठने की व्यवस्था

छोटे बच्चों को कैसे पढ़ाएं

स्कूल में जब बच्चे बैठते हैं तो नीचे कुर्सी होती है और ऊपर डेस्क होता। तो तब बच्चे बैठते हैं आराम से तो उनकी पीठ को बहुत सपोर्ट मिलता है, उन्हें बिल्कुल झुकना नहीं पड़ता।

आजकल बच्चे बेड पर बैठकर तकिए लगाकर पढ़ाई करते हैं जिससे उनकी पीठ में बहुत ज्यादा दर्द होता है जिसकी वजह से वो बहुत जल्दी थक जाते हैं.

और वो थक जाते हैं तो उनका असर उनकी किताब में भी दिखने लग जाता है. गंदी लिखाई, धीमे लिखना और बस नखरे ही नखरे।

तो आपने क्या करना है अपने बच्चों को अगर आप बेड पर भी पढ़ा रहे हो तो उनके लिए छोटा वाला स्टडी टेबल ले लीजिए जो आप उनकी गोद के पास ही रख लो.

तो उससे क्या होगा आपकी किताबें थोड़ी सी ऊंची हो जाएंगे और बच्चे की कमर में दर्द नहीं होगा हमेशा पीछे दीवार के पास अगर आप बच्चों को बैठा रहे हो तो एक सिरहाना का इस्तेमाल जरूर कीजिएगा।

जितनी अच्छी बैठने की व्यवस्था होगी बच्चा उतनी ज्यादा लंबे समय तक बैठकर पढ़ाई कर पाएगा।

मजाकिया अंदाज़ में पढ़ाईए  

तीसरी चीज जो कि छोटे बच्चों के लिए बहुत ज्यादा जरूरी है मजाकियां अंदाज़ में बच्चों को पढ़ाइए। जैसे कि आप ए, बी, सी, डी भी पढ़ा रहे हो तो ए, बी, सी, डी गाने के तरीके से पढ़ा सकते हो.

1-2 पढ़ा रहे हो तो 1-2 गाने की मदद से आप पढ़ा सकते हो. बच्चे को घर की चीजों से ही खेल-खेल में पढ़ा सकते हो जैसे कि काउंट करने को दीजिए या कुछ थोड़े से राजमा देदो, चने दे दो और उसे बोलो चलो एक, दो, तीन, चार  इस तरीके से काउंट करके दो.

तो जब हम बच्चों को खेल खेल में पढ़ाते हैं तो बच्चा ज्यादा रूचि लेता है. क्योंकि किताबें देखकर बच्चे के दिमाग में सेट हो चुका है कि भाई अब मुझे पढ़ाई करनी है.

लेकिन जब हम घर की चीजों से वही चीजें पढ़ाते हैं तो बच्चों को यह नहीं लगता कि वह पढ़ाई कर रहा है.

वर्कशीट मदद से पढ़ाईए  

देखिए क्या होता है जब हम बच्चों को वर्कशीट बना कर देते तो बच्चे के दिमाग में साफ़ हो जाता है कि मुझे छोटा- छोटा सा काम करना पूरा सब कुछ नहीं लिखना है.

आप A से Z तक बच्चों को लिखने को देंगे उससे अच्छा है कि आप बच्चों को खाली स्थान भरने को दीजिए कुछ अल्फाबेट 

कुछ अल्फाबेट आप लिख दीजिये और कुछ लिखेगा। तो इससे उसको लगता है कि मुझे पूरा नहीं ;लिखना पड रहा और दिमाग  दबाव लग रहा है.

तो आपकी यह पुष्टि भी हो जाती है कि बच्चे को आता है और यह भी कंफर्म हो जाता है कि बच्चा कर भी लेगा, नहीं तो अगर आपने बच्चों को बोल दिया कि A से Z तक लिख के दिखाओ तो वो करने से अपना जी चुराएगा।

इसलिए आप इस तरीके की वर्कशीट बनाओ जिससे आप कई तरीके से बच्चे के टेस्ट ले पाओ। तो वर्कशीट में थोड़ा सा आप लिखते हो थोड़ा सा बच्चा लिखता है तो बच्चे के दिमाग में यह रहता है कि पूरा उसे नहीं करना है और आप उसे ये भी बोल सकते हो कि देखो मैंने आपकी बहुत मदद की है है ना.. आधा तो मैंने  दिया। तो आप इस तरीके से भी बच्चे के साथ खेल सकते हो.

तो अगर आप वर्कशीट की मदद से बच्चों को पढ़ाओगे तो आप बच्चे का टेस्ट भी ले पाओगे, बच्चे को पढ़ा भी पाओगे और बच्चे को भी प्रेशर महसूस नहीं होगा।

अपने गुस्से पर कंट्रोल रखे

छोटे बच्चों को कैसे पढ़ाएं

पांचवी पर सबसे जरूरी बात अपने गुस्से पर थोड़ा सा कंट्रोल रखे. देखिए क्या होता है कि हम लोग सोचते हैं बच्चा नहीं कर रहा है.. नहीं कर रहा है तो बच्चे को भी थोड़ा ऑकवर्ड लगता है.

अगर आपको भी मैं आज के समय में कोई नई चीज सीखने को बोलूंगा तो आपको भी यही रहेगा ना यार आज नहीं कल से करेंगे। 

मैं आपको बोलूंगा आज से आपने कसरत करनी है तो आप भी बोलोगे कि यार आज से नहीं कल से करूंगा, कल बोलोगे कल नहीं परसो से करूंगा। तो कहने का मतलब है कि हम लोग भी ऐसा करते हैं.

तो यही चीज बच्चा भी कर रहा है तो कभी भी इतना प्रेशर बच्चे को मत कीजिए। कोई भी आपको डंडे की नोक पर आपसे कसरत नहीं करवा सकता जब तक कि आपकी खुद की इच्छा नहीं होगी।

वैसे ही बच्चे में थोड़ी सी इच्छा शक्ति आने दीजिए, ज़बरदस्ती आप कुछ नहीं करवा सकते हो. तो बच्चों को पढ़ाते समय अपने गुस्से को अपने हाथों को थोड़ा सा काबू में रखिये।     

निष्कर्ष:

उम्मीद करता हूँ कि इन सब बातों से आपको बच्चों पढ़ाने में जरूर मदद होगी। इसलिए आप इस पोस्ट “बच्चों को कैसे पढ़ाएं” को अपने दोस्तों के साथ शेयर भी कर सकते हैं ताकि उनको भी थोड़ी मदद मिल सके. आप अपने विचार हमे कमेंट करके बता सकते हैं, धन्यवाद !!

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